अरुण ग्रह का नाम तो आपने सुना होगा, जिसे अंग्रेजी में यूरेनस के नाम से जाना जाता है। इस ग्रह को गैस दानव भी कहा जाता है, क्योंकि इसमें मिट्टी-पत्थर के बजाय अधिकतर गैस है और इनका आकार बहुत ही विशाल है। आपको जानकर हैरानी होगी कि यह सौरमंडल का पहला ऐसा ग्रह है, जिसे टेलिस्कोप से ढूंढा गया था। यह सौरमंडल के आठ ग्रहों में सूर्य से दूरी के आधार पर सातवां सबसे दूर ग्रह है। आज हम आपको इस ग्रह की कुछ रोचक बातें बताने जा रहे हैं, जिसे जानकर आप भी हैरान रह जाएंगे।
अरुण यानी यूरेनस अपने अक्ष पर करीब 17 घंटे में एक चक्कर पूरा कर लेता है। इसका सीधा-सीधा मतलब है कि यूरेनस पर एक दिन मात्र 17 घंटे का ही होता है। यहां का एक साल पृथ्वी के 84 साल के बराबर होता है।
आपको यह जानकर बेहद ही हैरानी होगी कि अरुण पर 42 साल तक रात और 42 साल तक दिन होता है। इसका कारण यह है कि अरुण पर दोनों में से एक पोल यानी ध्रुव लगातार 42 साल तक सूर्य के सामने और दूसरा अंधकार में होता है।
अरुण ग्रह सूर्य से लगभग तीन अरब किलोमीटर दूर है। यही वजह है कि यह ग्रह बहुत ही ठंडा है। यहां का औसत तापमान -197 डिग्री सेल्सियस होता है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, अरुण का न्यूनतम तापमान -224 डिग्री सेल्सियस देखा गया है।
जहां पृथ्वी का महज एक ही चंद्रमा है, वही अरुण के कुल 27 प्राकृतिक उपग्रह यानी चंद्रमा हैं। हालांकि इनमें से अधिकतर चंद्रमा बहुत ही छोटे और असंतुलित हैं। इनका भार बहुत ही कम है।
अरुण अपने अक्ष पर 98 डिग्री तक झुका हुआ है। यही कारण है कि यहां मौसम बहुत ही असामान्य रहता है। यहां हमेशा तूफान जैसा माहौल बना रहता है। यहां हवाएं काफी तेज चलती रहती हैं जो अधिकतम 900 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार तक पहुंच जाती हैं।
अरुण ग्रह पर बादलों की अनेक परतें पाई जाती हैं। सबसे ऊपर मीथेन गैस होती है। इसके अलावा अरुण ग्रह के केंद्र में बर्फ और पत्थर पाए जाते हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि अरुण ग्रह पर मीथेन गैस की अधिकता, तापमान और हवा के कारण यहां हीरे की बारिश होती हो।
सूर्य के अधिक दूरी होने के कारण इस ग्रह पर सूर्य की किरणों को पहुंचने में दो घंटे 40 मिनट का समय लगता है। यह पृथ्वी से लगभग 20 गुना अधिक है। पृथ्वी पर सूर्य की किरणों को पहुंचने में आठ मिनट 17 सेकेंड का समय लगता है।





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