जगदीशपुर (अमेठी)। कोरोना वायरस के डर ने जिले में पोल्ट्री व्यवसाय को चौपट कर दिया है। आलम यह है कि जिले की कई मंडियों में मुर्गे की कीमत आलू से भी कम है। चिकन के शौकीनों में वायरस का डर इस कदर समाया है कि उन्होंने ब्वॉयलर मुर्गे की खरीदारी बंद कर दी है। इसका असर ट्रेडिंग के काम में लगे ट्रांसपोर्टर, मजदूर व वाहन संचालकों पर भी पड़ा है।
स्थानीय औद्योगिक क्षेत्र सहित इलाके में पोल्ट्री व्यवसाई चूजा बॉयलर मुर्गा, मुर्गी दाना और अंडे का बड़े पैमाने पर कारोबार करते हैं। सगुना, शालीमार, वेंकीज, इंडियन ब्वॉयलर जैसी मल्टी नेशनल और ग्रेविटी, सालवा, आरके एग्रो, केएस, रूबी, अवध व सोनू पोल्ट्री वे स्थानीय कंपनियां व फार्म हाउस हैं जहां बड़े स्तर पर चिकन उत्पादन किया जाता है।
पिछले लगभग एक महीने से सोशल मीडिया पर वायरल कोरोना वायरस की खबर का डर क्षेत्र के चिकन शौकीनों में बैठ गया है। चिकन शौकीनों की ओर से खरीदारी कम होते ही इसका असर मुर्गा व्यवसायियों पर दिखने लगा है। पोल्ट्री व्यवसाइयों को होली पर मुर्गे की सेल और रेट दोनों के बढ़ने की उम्मीद थी लेकिन वायरस का भय त्यौहार को भी ले डूबा।
मुर्गे का रेट बढ़ने के बजाय घटता गया। आलम यह है कि क्षेत्र में मुर्गे की कीमत आलू की कीमत से भी कम है। आरके एग्रो के एमडी मोहम्मद असलम ने बताया कि एक किलोग्राम बॉयलर मुर्गे पर करीब 75 रुपये का खर्च आता है और इसे 85 रुपये में बेचा जाता है।
इन दिनों बॉयलर मुर्गे की कीमत पांच से आठ रुपये प्रति किलोग्राम है जबकि क्षेत्र में आलू की कीमत 12 से 15 रुपये प्रति किलोग्राम है। उन्होंने बताया कि विक्रय दरों में आई गिरावट के चलते प्रतिदिन आने वाला मुर्गी दाना और चूजे की ट्रेडिंग में भी कमी आई है। इसका सीधा असर ट्रांसपोर्टर और ट्रेडिंग कंपनियों पर भी पड़ा है।

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