सुप्रीम कोर्ट तक विपक्ष के मार्च पर BJP का पलटवार: ‘सिर्फ नाटक’, राहुल गांधी पर निशाना


केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आरोप लगाया कि कांग्रेस अपनी चुनावी हारों के लिए चुनाव आयोग को दोष दे रही है, जबकि असली वजह पार्टी का ‘विचारशून्य नेतृत्व’ है।

नई दिल्ली | 13 अक्टूबर, 2026

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ याचिका दाखिल करने के लिए सोमवार को विपक्षी नेताओं द्वारा सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकाले जाने के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने कांग्रेस और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर जोरदार पलटवार किया है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस मार्च को “सिर्फ नाटक” करार देते हुए कहा कि कांग्रेस अपनी चुनावी हारों के लिए चुनाव आयोग को दोष दे रही है, जबकि इसकी असली वजह पार्टी का “विचारशून्य नेतृत्व” है।

चौहान ने BJP मुख्यालय में संवाददाताओं से कहा कि कांग्रेस न्यायपालिका, चुनाव आयोग और सशस्त्र बलों जैसी संस्थाओं पर सवाल उठाकर जनता को भ्रमित करने की कोशिश कर रही है और अपने राजनीतिक एजेंडे के लिए बाहरी ताकतों का सहारा ले रही है। उन्होंने दावा किया कि पार्टी लोगों के बीच अपनी विश्वसनीयता खो चुकी है।

हाल के उपचुनावों, असम, त्रिपुरा, राजस्थान के स्थानीय निकाय चुनावों और इससे पहले हिमाचल प्रदेश में मिली हारों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि एक के बाद एक चुनाव हारना और सड़कों पर विरोध प्रदर्शन करके अपनी निराशा निकालना कांग्रेस की नियति बन गई है। उन्होंने कहा, “संवैधानिक संस्थाओं पर अपनी हार का ठीकरा फोड़ना कांग्रेस का पाप है। हार की वजह चुनाव आयोग नहीं, कांग्रेस का खुद का ‘विचारशून्य’ नेतृत्व है, जिसके पास कोई विचार नहीं है।”

मार्च के क्रम में विपक्षी नेताओं ने प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत से मुलाकात का समय मांगा था, जिसे अस्वीकार कर दिया गया। इस पर निशाना साधते हुए चौहान ने कहा कि न्यायपालिका के प्रति नेता प्रतिपक्ष का रुख सबको पता है। उन्होंने कहा, “मुख्य न्यायाधीश से मुलाकात की भी एक तय प्रक्रिया होती है। आप चिट्ठी लिखकर जब मन करे तब पहुंच नहीं सकते। यह सिर्फ नाटक है, पूरा नाटक, और कुछ नहीं।”

राहुल गांधी द्वारा इस विरोध को “शिव की बारात” कहे जाने पर चौहान ने कटाक्ष किया कि जो लोग राम के विरोधी हैं वे शिव की बात कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “यह शिव की बारात नहीं, बल्कि उपद्रवी तत्वों का झुंड है जो सड़कों पर अराजकता फैलाने की कोशिश कर रहा है।”

चौहान ने उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के भीतर “नेतृत्व विवाद”, पंजाब इकाई के अध्यक्ष में हालिया बदलाव और कर्नाटक तथा तेलंगाना में जारी “सत्ता संघर्ष” का हवाला देते हुए कहा कि पार्टी की हारों की जड़ उसका अपना नेतृत्व है। उन्होंने आरोप लगाया कि तमिलनाडु, झारखंड और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में कांग्रेस “जूनियर पार्टनर” और “परजीवी दल” की स्थिति में पहुंच गई है।

सत्ता हासिल करने के लिए कांग्रेस कभी वामपंथियों तो कभी देश-विरोधी ताकतों का सहारा लेती है — चौहान ने यह आरोप लगाते हुए जॉर्ज सोरोस का नाम लिया और कहा कि ऐसी ताकतों से समर्थन मांगा जा रहा है। उनका दावा था कि सड़कों पर कितना भी हंगामा किया जाए, कांग्रेस को सफलता नहीं मिलेगी।

केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने एक्स पर एक पोस्ट में कांग्रेस को “दिशाहीन पार्टी” बताया और कहा कि प्रदर्शन हर नागरिक का अधिकार है, लेकिन संवैधानिक पदाधिकारियों का खुलकर अपमान करना निंदनीय है। उन्होंने लिखा कि कांग्रेस अपनी स्थिति सुधार सकती है अगर उसके पास एक परिपक्व और प्रतिबद्ध नेता हो।

पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने मार्च में शामिल विपक्षी नेताओं पर नियमों और कानूनों की समझ न होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “चुनाव आयोग पर आरोप हैं, लेकिन सबूत कहां है? अगर आरोप लगा रहे हैं तो सबूत भी पेश करना होगा। कौन से नियम-प्रक्रियाएं तोड़ी गईं, कौन सा कानून टूटा?”

यह खबर मुख्य रूप से BJP के रुख को दर्शाती है। सूत्र रिपोर्ट में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दायर याचिका की बारीकियां या कांग्रेस का जवाब शामिल नहीं है, इसलिए इस तस्वीर को इसी सीमा के साथ पढ़ा जाना चाहिए।

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